मसूर दाल के साइड इफेक्ट्स: चावल के साथ लाल मसूर दाल खाने का स्वाद अलग होता है। इस दाल के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। इसमें प्रोटीन भरपूर और कैलोरी कम होती है। जो लोग वज़न कम करना चाहते हैं, वे इसे अपनी डाइट में ज़रूर शामिल कर सकते हैं। यह मसल्स बनाने में भी मदद करती है।
इस दाल ने दशकों से एक खास जगह बनाई है। चाहे उबाली जाए, तली जाए, या रात भर भिगोई जाए, यह पौष्टिक दाल कई तरह के स्वाद देती है। चावल और दाल के मेल जैसा कुछ नहीं है।
यह दाल, जो प्रोटीन का सोर्स है, बीमारी से ठीक होने के दौरान खाई जा सकती है। इसमें फाइबर भरपूर होता है और यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह इम्यूनिटी बढ़ाने और एनीमिया को कम करने के लिए जानी जाती है। दिल की बीमारी से बचाने के अलावा, यह ग्लोइंग स्किन और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी अच्छी है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट दीक्षा भावसार का कहना है कि इतने सारे इस्तेमाल वाली यह दाल कुछ मामलों में बहुत नुकसानदायक भी हो सकती है। अगर आप लापरवाही करते हैं, तो हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ने का खतरा रहता है।
यूरिक एसिड: अगर आपको यूरिक एसिड की समस्या है, तो इस दाल से दूर रहना ही बेहतर है। इसमें प्यूरीन ज़्यादा होता है। ये शरीर में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ाते हैं और जोड़ों के दर्द को और बढ़ा देते हैं।
किडनी की समस्याएं: यह किडनी की बीमारियों से परेशान लोगों के लिए भी परेशानी वाली बात हो सकती है। इसमें मौजूद ऑक्सालेट की वजह से किडनी में पथरी बन सकती है।
पाचन संबंधी समस्याएं: इसमें फाइबर बहुत ज़्यादा होता है। इसलिए इसे ज़्यादा खाने से गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस दाल को खाते समय खूब पानी पीना चाहिए। नहीं तो पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाएगी।
ज़्यादा फैट: ज़्यादा प्रोटीन लेने से वज़न बढ़ सकता है। इससे शरीर में ज़्यादा फैट जमा हो सकता है।
जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को डॉक्टर से पूछे बिना इस दाल का ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। दाल के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं पर ध्यान दें और अपनी हेल्थ कंडीशन के हिसाब से इसे कम मात्रा में खाएं। तभी आप इसके पूरे फायदे सुरक्षित रूप से उठा पाएंगे।

