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इंग्लैंड के सिलेक्शन पर सरफराज ने सुनाई ‘असली हीरो’ और कड़े संघर्ष की कहानी

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इंग्लैंड के सिलेक्शन पर सरफराज ने सुनाई 'असली हीरो' और कड़े संघर्ष की कहानी

Struggle story of Sarfaraz Khan : ऐसे ही सफलता नहीं मिल जाती। सफलता पाने के लिए हजारों ठोकरों से लड़ना पड़ता है। कहते हैं न हर पत्थर में संघर्ष और शहनशीलता नहीं होती , नहीं तो हर पत्थर, पत्थर नहीं मूरत होती। आज हम ऐसे खिलाड़ी की कहानी बताने जा रहें हैं। जिसे सुनकर आपका भी दिल पानी की तरह पिघल जायेगा। जी हाँ वो खिलाड़ी कोई और नहीं सरफराज खान हैं।

सरफराज खान की स्ट्रगल स्टोरी को आगे बढ़ाने से पहले आप से छोटा सा रिक्वेस्ट। अगर आप हमारे इस यूट्यूब चैनल पर नये हैं तो चैनल को सब्सक्राइब, वीडियो को लाइक और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलियेगा। चलिए वीडियो को शुरू करते हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में सरफराज खान को डेब्यू करने का मौका मिला तो सरफराज खान को याद आयी अपनी स्ट्रगल स्टोरी। उन्होंने कहा हमारे संघर्ष भरे जीवन के असली हीरो मेरे पिता हैं। मेरे पिता का सपना है कि मै विव रिचर्ड्स, विराट कोहली और एबी डिविलियर्स जैसा प्लेयर बनू।

आपको बता दें, घरेलू क्रिकेट में बनाए ढेरों रनों ने सरफराज खान के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का दरवाजा खोल दिया है, लेकिन इस बल्लेबाज का मानना है कि सीखना हमेशा जारी रहता है. वह विराट कोहली, विव रिचर्ड्स और जावेद मियांदाद जैसे दिग्गजों की सूची में जगह बनाना हमारा और हमारे पिता का मेन मकसद है। सरफराज खान ने अपने स्ट्रगल के बारे में बात करते हुए कहा यहां तक के सफर में पिता की अहम भूमिका रही है।

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पिता चाहते हैं मैं विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, सर विवियन रिचर्ड्स जैसा बल्लेबाज बनूँ।

सरफराज ने कहा मैं जो रूट की बल्लेबाजी भी देखता हूं , ‘जो भी सफल हो रहा है, मैं उन्हें खेलते हुए देखता हूं कि वे ऐसा कैसे कर रहे हैं जिससे कि मैं सीख सकूं और इसे लागू कर सकूं। सरफराज ने कहा मेरे पिता ने अपने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए खूब मेहनत की है. ‘मेरे पिता ने मुझे क्रिकेट से जोड़ा और मैं हमेशा सोचता था कि मैं क्यों खेल रहा हूं. मैं एक आक्रामक बल्लेबाज हूं और मैं दूसरों की तुलना में जल्दी आउट हो जाता था और बड़ी पारियां खेलना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था.

दूसरों को सफल होता देख हमारे अंदर निराश उत्पन्न करती थी। लेकिन मेरे पिता हमेशा कड़ी मेहनत में विश्वास करते थे और मेरे पास जो आज जो कुछ भी है उसी काम का परिणाम है।

2015-2016 के घरेलू सीजन में अंडर -19 मैच के दौरान मुंबई के सेलेक्टर्स साथ अनबन होने के कारण सरफराज ने उत्तर प्रदेश के लिए खेलने का विकल्प चुना।

सरफराज ने कहा कि उनके पिता उन्हें बल्लेबाजी करते देखने के लिए उत्तर प्रदेश या जहां भी टीम खेलती थी वहां जाते थे. उन्होंने बताया, ‘यहां तक कि जब मैं मुंबई से उत्तर प्रदेश चला गया तब भी वह मुझसे मिलने के लिए फ्लाइट से आते थे. अब मुझे उन प्रयासों के प्रभाव और महत्व का अहसास हुआ है.’

26 वर्षीय बल्लेबाज सरफराज ने 45 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 69.85 की औसत से 3912 रन बनाए हैं जिसमें 14 शतक और 11 अर्धशतक शामिल हैं. उनका औसत भी 70.48 का है जो उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाता है. सरफराज से जब उनके प्रदर्शन में निरंतरता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मेरी ताकत यह है कि मैं आसानी से संतुष्ट नहीं होता.

उन्होंने कहा, ‘अगर आप टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं तो आपको धैर्य रखना होगा और हर दिन अभ्यास करना होगा. मैं पूरे दिन क्रिकेट खेलता हूं और यही कारण है कि मैं लंबे समय तक पिच पर रह सकता हूं.’

खान एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं जिनमें एक सफल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने की क्षमता है। वह अभी भी युवा है और उसके पास अपने खेल में सुधार करने और भारतीय टीम में नियमित बनने का समय है।

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